शनिवार, 30 जनवरी 2021

खटीमा में घुमाने के बहाने रिश्ते के भाई ने नाबालिगों का किया अपहरण

झनकट क्षेत्र में रिश्तेदारी में आया एक युवक दो नाबालिग चचेरी बहनों को कार में घुमाने के बहाने भगा ले गया। जहां उनके साथ छेड़छाड़ भी की। दूसरे दिन ग्रामीणों ने आरोपित को पकड़ कर पुलिस के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने आरोपित के विरुद्घ अपहरण, दुष्कर्म व पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश कर दिया। आरोपित रिश्ते में नाबालिगों का भाई लगता है। झनकट क्षेत्र के एक व्यक्ति ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनका दूर का रिश्तेदार टनकपुर चम्पावत निवासी दीपू बुधवार की सुबह कार संख्या यूके06एम 3783 से उनके घर आया था। आरोप है कि युवक बहू व आठ वर्षीय भतीजी व नौ वर्षीय पुत्री को कार में घुमाने की बात कहकर अपने साथ ले गया। कुछ दूर जाने के बाद आरोपित ने बहू को कार से उतार दिया। इसके बाद दोनों नाबालिगों को कार में लेकर गायब हो गया। काफी देर तक जब वह घर नहीं पहुंचीं तो गांव में सनसनी फैल गई। पीडि़त ने इसकी सूचना पुलिस को दी। जिस पर पुलिस ने युवक के विरुद्घ अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया। पूरी रात पुलिस कर्मी सीसीटीवी फुटेज की  मदद व नाकेबंदी कर आरोपित की तलाश में जुटे रहे।

 कोतवाल नरेश चौहान ने बताया कि आरोपित मासूमों को कार में बैठाने के बाद लोहियाहेड रोड लेकर गया था। जहां उसने पूरी रात मासूमों को अपने साथ रखा और उनसे छेड़छाड़ भी की। गुरुवार की तड़के जब युवक मासूमों को लेकर गांव की ओर जा रहा था। तभी ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया। पुलिस ने आरोपित दीपू व उसकी कार को कब्जे में लेने के बाद 363, 376 व पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे न्यायालय पेश किया है। वहीं मासूमों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है।

शनिवार, 16 जनवरी 2021

खटीमा में 30 नए स्थानों पर लगेंगे सीसीटीवी

 

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खटीमा में 30 नए स्थानों पर लगेंगे सीसीटीवी

खटीमा स्थित कोतवाली क्षेत्र की निगरानी के लिए 30 नए सीसीटीवी लगाए जाएंगे।

खटीमा : कोतवाली क्षेत्र की निगरानी के लिए 30 नए सीसीटीवी लगाए जाएंगे। इसके लिए स्थान चिह्नित कर लिए गए हैं। चकरपुर व झनकट बाजार भी कैमरों की निगरानी में रहेंगे। कोतवाली में इन कैमरों का कंट्रोल रूम बनाया जाएगा।

खटीमा कोतवाली क्षेत्र पड़ोसी देश नेपाल के साथ ही उत्तर प्रदेश की सीमाओं से से लगा हुआ है। जिसकी वजह से यह क्षेत्र सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील है। अराजकतत्व यहां वारदात करने के बाद आसानी से सीमा पार कर जाते हैं। इसी के मद्देनजर पुलिस ने सीमांत क्षेत्र कोतवाली की तीसरी आंख से निगरानी की पहल की है। पहले भी कुछ स्थानों पर सीसीटीवी लगाए गए थे। जिनमें से कुछ खराब पड़े हैं। जिन्हें ठीक कराया जा रहा है। इसके अलावा अब पुलिस ने नए सिरे से 30 स्थानों पर सीसीटीवी लगाने का निर्णय लिया है। इसके लिए संवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर लिया गया है। इनमें नगर के टनकपुर, मेलाघाट रोड मुख्य बाजार, मझोला, चकरपुर, झनकट बाजार के अलावा नदन्ना पुल एवं रेलवे स्टेशन के समीप के स्थानों पर कैमरे लगवाने की तैयारी की जा रही है। यह सभी स्थान भीड़-भाड़ वाले हैं। तीसरी आंख कें माध्यम से यहां की गतिविधियों पर पूरी तरह से नजर रखी जा सकेगी। कोतवाली में इसका कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। कोतवाल नरेश चौहान ने बताया कि सभी चयनित स्थानों पर जल्द कैमरे लगा दिए जाएंगे। जिनका कंट्रोल रूम कोतवाली में रहेगा। इससे अपराधिक घटनाओं की रोकथाम में काफी मदद मिल सकेगी। साथ क्षेत्र में चोरी आदि घटनाओं पर अंकुश लग जाएगा।

कोतवाली खटीमा द्वारा नशे व मादक पदार्थों के विरुद्ध चलाए गए अभियान के तहत 03 किलोग्राम चरस क़े साथ पकड़ा गया अभियुक्त

 

थाना खटीमा – श्रीमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय द्बारा नशे व मादक पदार्थों के विरुद्ध चलाए गए अभियान के तहत उच्चाधिकारियों के दिशा निर्देशन में दिनांक 13.01. 2021 को श्रीमान प्रभारी निरीक्षक खटीमा महोदय क़े नेतृत्व मेँ थाना खटीमा पुलिस द्वारा कार्यवाही करते हुए अभियुक्त बलदेव सिंह राणा पुत्र जगतदेव सिंह निवासी सबोरा कोतवाली खटीमा उधमसिंह नगर को 03 किलोग्राम चरस क़े साथ पकड़ा गया जिसके विरूद्ध थाना खटीमा मे FIR NO 15/2021 धारा 8/20 NDPS अधिनियम में मुकदमा पंजीकृत किया गया है अभियुक्त को आज दिनांक 15/1/2021को माननीय न्यायालय क़े सामने पेश किया जा रहा है । श्रीमान वरिष्ट पुलिस अधीक्षक ऊधम सिंह नगर द्वारा पुलिस टीम को 2500/रुपए के ईनाम की घोषणा की गई है।
पुलिस टीम
1- निरीक्षक नरेश चौहान
2- उप० निरी लक्ष्मण सिंह
3- उप० निरी होशियार सिंह
4- का० चन्दर सिंह
5- का० महेंद्र डंगवाल
6- का० नवीन कन्याल
7- का० नाशिर

सोमवार, 21 सितंबर 2020

उत्तराखंड: राकेश ने 25 लाख की अंगूठी लौटाकर पेश की ईमानदारी की मिशाल… 51 हजार का मिला इनाम!


ऐसे ही उत्तराखंड का नाम विख्यात नहीं है... यहां की भूमि देवो की भूमि है, कई चीजों के लिए उत्तराखंड का नाम आपको पूरे देश भर में प्रसिद्ध मिलेगा, लेकिन इन्हीं में से एक पहाड़ के लोगों का प्रेम और इमानदारी भी है. इसका  एक बड़ा उदाहरण आज राकेश रावत ने मिशाल के तौर पर पेश किया है, राकेश रावत जो गांव रामपुर न्यालसू के निवासी है,और जो केदारनाथ में काम करते है ने एक बार फिर उत्तराखंड का नाम को गौरवान्वित कर दिया। दरअसल कुछ दिन पहले उन्हें काम करते समय एक सोने की अंगूठी मिली और उन्होंने इस तुरंत लौटने का फैसला लिया।

दरअसल कुछ दिन पहले राजस्थान से यात्रा करने आए श्रद्धालुओं की अंगूठी केदारनाथ में ही कहीं खो गई थी, जिसकी कीमत लगभग 25 लाख थी। और जो काम करते समय राकेश को मिल गयी थी, जिसके बाद उन्होंने तुरंत यात्रियों से संपर्क किया और उन्हें अंगूठी वापस देने का फैसला किया। उनकी ईमानदारी को देख श्रद्धालु बहुत ज्यादा प्रभावित हुए और उन्होंने राकेश को ₹51000 इनाम के रूप में दिए .


एक बहुत ही गौरव की बात है कि आज भी लोगों में मानवता जीवित है, वहीं राकेश की इमानदारी पर पूरे प्रदेश को गर्व है। उनके इस काम से एक बार फिर पुरे प्रदेश का नाम ऊँचा हो गया.

रविवार, 20 सितंबर 2020

Khatima खटीमा शहर का नाम आखिर खटीमा क्यों पढ़ा?

  खटीमा का नाम #खटीमा क्यों पढ़ा लोगो की अलग अलग मान्यताएं है?
कुछ लोगो का कहना है कि-
बहुत समय पहले #खटीमा मार्केट जो है वहां बहुत बडा आम का बगीचा हुआ करता था। जिसमें बहुत ही खट्टे आम हुआ करते थे। जो खट्टे-आम के बाजार के नाम से जाना जाता था।जो बाद में खटेमा,और फिर खटीमा नाम से जाना गया।
यह भी मान्यता है कि -
मान्यवर नबाब मेंहदी अलीखान की दो बीबी थी एक का नाम सितारा बेगम दुसरी का नाम #खतिमा बेगम था।
 सितारा के नाम से #सितारगंज और खतिमा के नाम से #खतिमा पढ़ा। कुछ समय पहले तक रेलवे टिकट और रेलवे स्टेशन पर #खतिमा लिखा था बाद मे खटीमा हुआ नानक मत्ता गुरूद्वारे के गेट न02पर नबाब मेंहदी अली खांन का नाम आज भी लिखा हुआ है।
और कुछ लोग यह भी बोलते है - बहुत समय पहले की बात है , "यहाँ मलेरिया और काला बुखार का प्रकोप महामारी का विकराल रूप ले लेता था। लोग बीमार हो जाते थे और वो खाट में पड़ कर ही वैद्य के यहाँ जाते थे। इसीलिए इसका नाम खटीमा अर्थात् खाटमा पड़ गया।’’

 कुछ लोगो का यह भी है कहना कि- बहुत समय पहले यहां बाजार के बजाय लोगों का घर हुआ करता था। एक छोटा व्यापारी भटकते हुए यहां से जा रहा था।उसने एक व्यक्ति को अपने घर के दरवाजे पर खड़ा देखा तो उसने इस  जगह का नाम पूछा। जब तक वह कुछ बोल पता तब तक उस की बीबी जो नाराज थी। दरवाजा बंद कर दिया और जोर से खट की आवाज आया जिसे कारण उसकी उंगली दब गई और मुह से माँ की आवाज निकला।
दोनो आवाज व्यापारी ने एक साथ सुनी और तब से खटीमा नाम से जाना जाता है।😜

थारू समाज के अनुसार यह भी है मान्यता-"थारू समाज में विवाह के समय जब बारात जाती है तो वर को रजाई ओढ़ा दी जाती है और खाट पर बैठा कर ही उसकी बारात चढ़ाई जाती है। वैसे आजकल रजाई का स्थान कम्बल ने ले लिया है। इसलिए भी इस जगह खाटमा अर्थात् खटीमा पुकारा जाता है।’’

खटीमा भारत के उत्तराखण्ड राज्य के #ऊधमसिंह नगर जिले में स्थित एक नगर निगम बोर्ड है। खटीमा नगर पंचायत को वर्ष 1988 में उच्चीकृत कर नगर पालिका का दर्जा दिया गया था। यहाँ पर कुमाऊँनी लोग बड़ी संख्या में बसे हुए हैं जो पिथौरागढ़ के पहाड़ी क्षेत्र से यहाँ आकर बसे हैं। यहाँ पर सिखों और मुसलमानों की भी बहुत बड़ी संख्या है। मुख्य भाषाएँ हैं हिन्दी और कुमाऊँनी (पहाड़ी)। भूस्कावामित्व का मुद्दा अहम है क्योंकि पर्वतीय व थारू जनजाति के मध्य हुई जमीन की खरीदफरोख्त अब तीन पीढ़ी आगे बढ़ चुकी है और अभी भी अभिलेखों में भूस्वामी मूल व्यक्ति ही हैं।

 खटीमा यों तो एक बहुत पुराना क़स्बा है । यह थारू जाति का आदिवासी क्षेत्र है।
खटीमा को मुगलों के शासनकाल में इसे थारू जन-जाति के लोगों ने आबाद किया था।
यहाँ के मूल निवासी महाराणा प्रताप के वंशज राणा-थारू है।

 2001 की जनगणना  खटीमा  में 1,20,487 की आबादी थी. पुरुषों और महिलाओं की जनसंख्या 46% से 54% है. खटीमा 66% की औसत साक्षरता दर, 59.5% के राष्ट्रीय औसत से अधिक है: पुरुष साक्षरता 73% है, और महिला साक्षरता 58% है. यहाँ  मुख्य रूप से कुमाऊंनी लोगो का  क्षेत्र  तय हो चुका है.  शहर में एक बड़े आकार का सिख और मुस्लिम आबादी है. मुख्य  भाषाओं हिंदी और कुमाऊंनी (पहाड़ी)  हैं

 

 

 

खटीमा में स्पो‌र्ट्स स्टेडियम निर्माण के लिए रास्ता अब साफ हो चुका है।

 

खटीमा में स्पो‌र्ट्स स्टेडियम निर्माण के लिए रास्ता अब साफ हो चुका है। वन विभाग ने भूमि देने की स्वीकृति पर मुहर लगा दी है। जल्द वन विभाग के जमीन पर खेल मैदान तैयार होगा। विभाग इसे लेकर तैयारियों में जुटा है। अब खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए बेहतर सुविधाएं होंगी।

खटीमा ब्लॉक के ग्राम चकरपुर में स्पो‌र्ट्स स्टेडियम निर्माण के लिए पांच साल से प्रक्रिया चल रही थी। कई अड़चनों को दूर करते हुए स्टेडियम निर्माण की हरी झंडी मिल गई है। वर्ष 2016 में खटीमा में स्पो‌र्ट्स स्टेडियम बनाने की मांग हुई तो इसकी जिम्मेदारी जिला युवा कल्याण अधिकारी को सौंपी गई थी। इसके लिए चकरपुर वन चेतना केंद्र के डेढ़ हेक्टेयर भूमि चयनित की गई। वन विभाग की भूमि हस्तांतरण को लेकर एक साल तक कागजात पूरी करने और औपचारिकताएं पूरी नहीं हो सकीं। इसके बाद जिला युवा कल्याण विभाग ने स्टेडियम बनाने की फाइल खेल विभाग को हस्तांतरित कर दी। वर्ष 2017-18 से जिला खेल विभाग खटीमा में स्पो‌र्ट्स स्टेडियम बनाने को लेकर पत्राचार आरंभ किया। बीच में कई समस्याएं आईं। इसमें कहीं डिजिटल मैप फेल हुआ तो कहीं कुछ अड़चनें आईं। अंतिम दौर में चकरपुर स्टेडियम डेढ़ हेक्टेयर की भूमि के बदले चकरपुर वन प्रभाग को पौड़ी जनपद के थैलीसैंड़ में तीन हेक्टेयर भूमि दी जाएगी। इस भूमि पर वन विभाग को पौधे रोपने एवं उन पौधों के 10 सालों तक संरक्षण के लिए क्षतिपूर्ति राशि भी खेल विभाग की ओर से दी जाएगी। भूमि के लिए लगभग सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं।

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चकरपुर वन क्षेत्र में स्पो‌र्ट्स स्टेडियम बनाने के लिए भूमि संबंधित सभी कार्य लगभग पूरे कर लिए गए हैं। फाइल और दस्तावेज ऑनलाइन होने के बाद जमीन विभाग की होगी। इसके बाद स्टेडियम बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा और आगे की कार्रवाई की जाएगी।

- रशिका सिद्दीकी, जिला क्रीड़ा अधिकारी ऊधम सिंह नगर

शनिवार, 19 सितंबर 2020

खटीमा के जंगल में घूम रहे नेपाली हाथी, दहशत में ग्रामीण

नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी से निकलकर सितरागंज तक पहुंचने वाले दोनों हाथी खटीमा के जंगल में विचरण कर रहे हैं। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश वन विभाग की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। शारदा नदी पार कर दो नेपाली हाथी 15 सितंबर की रात सेल्हा और मझारा गांव पहुंच गए थे। हाथियों ने कई किसानों की फसलों को खराब कर दिया था।

ग्रामीणों और वन विभाग की टीम के खदेड़ने पर हाथी पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज में दाखिल होने के बाद महोफ रेंज होते हुए रात में उत्तराखंड तरफ निकल गए थे। 16 सितम्बर को नेपाली हाथियों ने खटीमा क्षेत्र के कई किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाते हुए मझोला क्षेत्र से निकलकर उत्तराखंड के कस्बा सितारगंज क्षेत्र की तरफ धाबा बोला था।

उनकी वाचिंग करने के लिए दोनों प्रांतों की टीम जुटी हुई है जो उन्हें नेपाल की तरफ वापस ले जाने का प्रयास कर रही है। गुरूवार की शाम के समय तक दोनों हाथी खटीमा के जंगल के अंदर पहुंच गए। पिछले वर्ष जिन दो नेपाली हाथियों ने रामपुर तक पहुंचकर उत्पात मचाया था यह दोनों हाथी वहीं होने की बात वन विभाग के अधिकारी कह रहे हैं।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व के एसडीओ प्रवीण खरे ने बताया कि खटीमा जंगल के बेहद अंदर दोनों हाथी है। जंगल के रास्तों से ही उन्हें शुक्ला फांटा सेंचुरी भेजने की कवायद की जा रही है। टीमें लगातार उनकी निगरानी कर रही हैं।

नानकमत्ता हत्याकांड का पर्दाफाश, तीन गिरफ्तार, इसलिए हुआ एक परिवार के चार लोगों का मर्डर

एक ही परिवार के चार लोगों की गला रेतकर हुई हत्या का पुलिस ने पर्दाफाश कर लिया है। हत्या डकैती के मकसद से की गई थी। इस मामले में पुलिस ने तीन...